हमारी मातृभाषा


यह मेरा लिखा हुआ नहीं है, ये लेख , कविता , या जो भी है, बिल्कुल सत्य है | मेरे परदादा, संस्कृत और हिंदी जानते थे। माथे पे तिलक, और सर पर पगड़ी बाँधते थे।। फिर मेरे दादा जी का, दौर आया। उन्होंने पगड़ी उतारी, पर जनेऊ बचाया।। मेरे दादा जी, अंग्रेजी बिलकुल नहीं जानते... Continue Reading →

अभिशाप


क्यों है मेरा हृदय आज इतना हताशनिरंतर घट रही घटनाओं से निराश PLASTIC मन में नही है कोई सार्थक विचारजैसे हो गया मैं पूर्णतः निराधार CORONA स्तब्ध हूं परन्तु कारण विलुप्तशिथिल शरीर है लक्ष्य है गुप्तजीव हत्या मूल मंत्र बन चुका हैमनुष्य अधर्म राह बढ़ चला है DEPRESSION प्राकृतिक उपहारों को नष्ट करनादानव मानव अपना... Continue Reading →

वास्तविकता


पत्थर के दिल है, शीशे की जुबानें धुँए के शहर हैं,प्यार की दुकानें बोतल मे पानी,डब्बे मे हवा, झूठी मुस्काने , जीने की दवा, अकेला मुसाफिर है,रास्तो पर भीड़ सबकी अपनी दुनिया है,सबकी अपनी सीध सबके अपने मतलब,सबके जरूरी काम जब ज़रूरत पड़े,सबको सीधी राम राम सामने मेरा सबकुछ तु,तू है मेरी जान पलके झपकी... Continue Reading →

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