हमारी मातृभाषा


यह मेरा लिखा हुआ नहीं है, ये लेख , कविता , या जो भी है, बिल्कुल सत्य है | मेरे परदादा, संस्कृत और हिंदी जानते थे। माथे पे तिलक, और सर पर पगड़ी बाँधते थे।। फिर मेरे दादा जी का, दौर आया। उन्होंने पगड़ी उतारी, पर जनेऊ बचाया।। मेरे दादा जी, अंग्रेजी बिलकुल नहीं जानते... Continue Reading →

समय


पांचवी तक घर से तख्ती लेकर स्कूल गए थे. स्लेट को जीभ से चाटकर अक्षर मिटाने की हमारी स्थाई आदत थी लेकिन इसमें पापबोध भी था कि कहीं विद्यामाता नाराज न हो जायें । पढ़ाई का तनाव हमने पेन्सिल का पिछला हिस्सा चबाकर मिटाया था ।   स्कूल में टाट पट्टी की अनुपलब्धता में घर... Continue Reading →

मेरी सोच


हे गांधी मुझको माफ करो , मै झूंठ नहीं लिख पाउँगी । राष्ट्रपिता कहने से पहले , अपनी नजरों में गिर जाऊँगी ।। माना आजादी के हवनकुंड में , तुमने भी था हव्य चढ़ाया। लाठी खायी जेल गए थे , सत्याग्रह उपवास चढ़ाया ।। छलछंद खेल कर किसने , सुभाष का निष्कासन करवाया था। तुम... Continue Reading →

मेरा भारत


इन कागज़ों में बंद है किस्मत ये 10th 12th की मार्कशीट ये टीचर के दस्तखत ये बस्ते का बोझ और ये पढ़ाई हमे कामयाब बनाएगी- ये फालतू की सोच मैं ये नही कह रहा पढ़ना बुरा है पढ़ाई के बिना जीवन अधूरा है क्या अजीब दिमाग बांधा हम इंडियंस का इन अंग्रेज़ो ने कितने सालो... Continue Reading →

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