हमारी मातृभाषा


यह मेरा लिखा हुआ नहीं है, ये लेख , कविता , या जो भी है, बिल्कुल सत्य है | मेरे परदादा, संस्कृत और हिंदी जानते थे। माथे पे तिलक, और सर पर पगड़ी बाँधते थे।। फिर मेरे दादा जी का, दौर आया। उन्होंने पगड़ी उतारी, पर जनेऊ बचाया।। मेरे दादा जी, अंग्रेजी बिलकुल नहीं जानते... Continue Reading →

अभिशाप


क्यों है मेरा हृदय आज इतना हताशनिरंतर घट रही घटनाओं से निराश PLASTIC मन में नही है कोई सार्थक विचारजैसे हो गया मैं पूर्णतः निराधार CORONA स्तब्ध हूं परन्तु कारण विलुप्तशिथिल शरीर है लक्ष्य है गुप्तजीव हत्या मूल मंत्र बन चुका हैमनुष्य अधर्म राह बढ़ चला है DEPRESSION प्राकृतिक उपहारों को नष्ट करनादानव मानव अपना... Continue Reading →

अधर्म


स्वार्थ परम कर्तव्य बन गया, हंसी ठिठोली ले गई प्राण, अपने लिए करते प्राकृतिक नुकसान, फिर घड़ियाली आंसू रोए इंसान, दिखावा करने की आदत, रोकर सबके सामने बने महान, https://youtu.be/TMrtLsQbaok वृक्ष कट रहे हर पल, वायु प्रदूषित हो रही है, जल हो गया विषैला, प्रजातियां दुर्लभ हो रहीं है, पुराणों में लिखा एक महापाप, गर्भपात... Continue Reading →

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